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Amitabh Bachchan became a star with Prakash Mehra’s ‘Zanjeer’, know interesting facts about the film | प्रकाश मेहरा की ‘जंजीर’ से स्टार बने थे अमिताभ बच्चन, तीन सुपरस्टार्स के ठुकराने के बाद मेहरा ने बिग बी की कास्टिंग की तो उन्हें झेलनी पड़ी थी आलोचना

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31 मिनट पहले

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कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों के निर्माता प्रकाश मेहरा की आज बर्थ एनिवर्सरी है। 13 जुलाई, 1939 को बिजनौर, उत्तर प्रदेश में जन्मे प्रकाश मेहरा अब इस दुनिया में नहीं हैं और 17 मई, 2009 को उनका निधन हो गया था लेकिन उनकी बनाई फिल्म ‘जंजीर’ एक आइकॉनिक फिल्म थी जिसके लिए वह आज भी याद किए जाते हैं।

'जंजीर' के एक सीन में अमिताभ बच्चन।

‘जंजीर’ के एक सीन में अमिताभ बच्चन।

11 मई 1973 को रिलीज हुई ‘जंजीर’ वह फिल्म थी, जिसने 4 साल के संघर्ष के बाद अमिताभ बच्चन को स्टारडम का स्वाद चखाया था। इससे पहले उन्होंने बतौर एक्टर 12 फिल्मों में काम किया। लेकिन सिर्फ दो ही (बतौर लीड एक्टर ‘बॉम्बे टू गोवा’ और सपोर्टिंग एक्टर के तौर पर ‘आनंद’) हिट हुई थीं। हालांकि, ‘जंजीर’ का संघर्ष भी अमिताभ के संघर्ष से कम नहीं था। एक इंटरव्यू में प्रकाश मेहरा ने खुद फिल्म से जुड़े फैक्ट्स बताए थे जिनपर डालते हैं एक नज़र….

किस्मत से अमिताभ को मिली थी ‘जंजीर’

अमिताभ बच्चन से पहले ‘जंजीर’ धर्मेंद्र, देव आनंद और राजकुमार को ऑफर हुई थी। लेकिन यह शायद अमिताभ की किस्मत ही थी कि तीनों में से किसी के साथ भी प्रकाश मेहरा इस फिल्म को फ्लोर पर नहीं ला पाए। मेहरा ने एक इंटरव्यू में पूरी कहानी सुनाई थी। उन्होंने कहा था कि यह फिल्म हकीकत में उनकी नहीं थी। बल्कि धर्मेंद्र सलीम-जावेद से इसकी कहानी खरीद चुके थे। उसी समय मेहरा ‘समाधि’ नाम से फिल्म बनाने की प्लानिंग कर रहे थे। जब धर्मेंद्र को यह पता चला तो उन्हें आइडिया इतना पसंद आया कि उन्होंने ‘समाधि’ के बदले ‘जंजीर’ मेहरा को दे दी।

धर्मेंद्र और मुमताज के नाम का हो चुका था ऐलान

एक इंटरव्यू में प्रकाश मेहरा ने बताया था कि धर्मेंद्र फिल्म में लीड रोल करने को तैयार हो गए थे। वे इसे प्रोड्यूस भी करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने धर्मेंद्र और मुमताज को लीड रील में लेकर फिल्म का ऐलान कर दिया था। यही वह वक्त था जब मेहरा ने जाने-माने लेखक के। नारायण से ‘कहानी किस्मत की’ का आइडिया खरीदा था। धर्मेंद्र को भी यह सब्जेक्ट पसंद आया। बकौल मेहरा, “धर्मेंद्र ने मुझसे कहा कि मैं यह आइडिया फिल्म इंडस्ट्री में उनके गॉडफादर अर्जुन हिंगोरानी को दे दूं तो वे ‘जंजीर’ में पूरा सपोर्ट देंगे। मुझे दुख हुआ। लेकिन मैंने कहा कि मैं ‘जंजीर’ के लिए दो फिल्मों से समझौता नहीं कर सकता।”

जब धर्मेंद्र ने फिल्म करने से इनकार कर दिया

मेहरा ने आगे कहा था, “एक दिन धर्मेंद्र ने मुझसे कहा कि वे अपने भाई की फिल्म शुरू करना चाहते हैं और इसकी शूटिंग आधी होने के बाद ‘जंजीर’ शुरू कर पाएंगे। मेरी प्लानिंग अपनी फिल्म को 6 महीने में पूरी करने की थी। मैंने उन्हें बहुत मनाने की कोशिश की कि शूटिंग डिले नहीं करनी चाहिए। लेकिन वे तैयार नहीं हुए। मैं लंबा इंतजार नहीं कर सकता था। एक दिन धर्मेंद्र के साथ बैठकर शांति से बात की तो वे इस बात पर सहमत हो गए कि वे अपने व्यस्त शेड्यूल के चलते यह फिल्म नहीं करेंगे।”

देव भी अपनी शर्तों पर करना चाहते थे फिल्म

प्रकाश मेहरा के मुताबिक, जब धर्मेंद्र ने फिल्म छोड़ दी तो वे देव आनंद के पास गए। उन्हें कहानी पसंद आई। लेकिन उन्हें इसमें गानों की कमी खली। उन्होंने फिल्म में तीन-चार गाने डालने के लिए कहा। लेकिन मेहरा इसके लिए तैयार नहीं हुए। इसके बाद देव साहब ने पूछा कि अगर वे अपने होम प्रोडक्शन नव निकेतन के बैनर तले इस फिल्म को बनाना चाहें तो वे कितना पैसा लेंगे। लेकिन मेहरा इस बात के लिए तैयार नहीं हुए। इस पर देव आनंद ने फिल्म करने से इनकार कर दिया।

राजकुमार चाहते थे साउथ में हो फिल्म की शूटिंग

देव आनंद के बाद मेहरा राजकुमार के पास ‘जंजीर’ का ऑफर लेकर गए। उस वक्त राजकुमार मुमताज के मद्रास (अब चेन्नई) में एक फिल्म पर काम कर रहे थे। राजकुमार को फिल्म इतनी पसंद आई कि वे अगले दिन से ही शूटिंग शुरू करने के लिए तैयार थे। लेकिन वे चाहते थे कि मेहरा इसे साउथ इंडिया में ही शूट करें, ताकि उनका मद्रास का शूट भी जारी रह सके। हालांकि, फिल्म की कहानी बॉम्बे (अब मुंबई) की थी, इसलिए मेहरा ने राजकुमार की शर्त नहीं मानी।

फिर प्राण ने कहा- अमिताभ को फिल्म में ले लो

मेहरा की मानें तो तीन सुपरस्टार्स ने फिल्म ठुकरा दी तो वे तनाव में आ गए थे। तभी एक दिन प्राण ने उन्हें अमिताभ बच्चन को फिल्म में लेने की सलाह दी। मेहरा कहते हैं, “प्राण ने मुझसे कहा-‘अमिताभ को ‘बॉम्बे टू गोवा’ में देखने के बाद मेरी गट फीलिंग हैं कि वह भविष्य का स्टार है।’ खासतौर पर मैं भी फिल्म में शत्रुघ्न सिन्हा के साथ अमिताभ के फाइट सीन से इम्प्रेस्ड था। अमिताभ की आंखों में इमोशंस को देखकर मैंने उन्हें सिलेक्ट कर लिया। मैंने सोचा कि मुझे इस इंसान को अपनी फिल्म में एक ब्रेक देना चाहिए।”

प्रकाश मेहरा, अमिताभ बच्चन और मनमोहन देसाई।

प्रकाश मेहरा, अमिताभ बच्चन और मनमोहन देसाई।

अमिताभ के सिलेक्शन पर हुई थी मेहरा की आलोचना

प्रकाश मेहरा की मानें तो जब उन्होंने अमिताभ बच्चन को अपनी फिल्म के लिए सिलेक्ट किया तो उनकी खूब आलोचना हुई थी। फरवरी 1973 में अमिताभ-मुमताज स्टारर ‘बंधे हाथ’ फ्लॉप हुई, तब भी लोगों ने कहा कि ‘जंजीर’ का सफल होना नामुमकिन है। वहीं, अमिताभ खुद भी ‘बंधे हाथ’ की असफलता के बाद बहुत परेशान थे और उन्होंने मेहरा को कहा था कि अगर जंजीर भी फ्लॉप हो गई तो वे अपने गृह नगर इलाहाबाद वापस चले जाएंगे।”

'जंजीर' की शूटिंग के दौरान प्राण, जया और अमिताभ।

‘जंजीर’ की शूटिंग के दौरान प्राण, जया और अमिताभ।

मेहरा का संघर्ष खत्म नहीं हुआ था

‘जंजीर’ में अमिताभ के सिलेक्शन के बाद भी मेहरा का संघर्ष खत्म नहीं हुआ था। उन्हें बड़ा झटका तब लगा, जब हीरोइन मुमताज ने शादी का फैसला कर फिल्म में काम करने से इनकार कर दिया। हालांकि, खुशकिस्मती से उसी वक्त मेहरा एक अन्य फिल्म में जया भादुड़ी के साथ काम कर रहे थे। अमिताभ ने जया से कहा कि कोई भी हीरोइन उनके साथ काम नहीं करना चाहती। तब जया ने उनसे कहा कि वे मेहरा को उन्हें अप्रोच करने के लिए कहें। इस तरह जंजीर की कास्टिंग पूरी हुई।

डिस्ट्रीब्यूटर हंसी उड़ाते तो रोते थे अमिताभ

प्रकाश मेहरा की मानें तो उनके पास फाइनेंसर नहीं थे और डिस्ट्रीब्यूटर भी फिल्म को लेने को तैयार नहीं थे। बकौल मेहरा, “वे मुझपर हंसते थे और कहते थे यह लंबा बेवकूफ हीरो कौन है? अमिताभ रोते थे। वे उन दिनों मुझे सर कहते थे। लेकिन मैंने कहा कि मैं उनका प्रोफेसर या टीचर नहीं था। मैं उनका डायरेक्टर था। तब उन्होंने मुझे लल्ला (यूपी में भाई के लिए इस्तेमाल होने वाला संबोधन) कहना शुरू किया। उन्होंने शिकायत की कि लल्ला मैं नहीं जानता कि इस फिल्म के बाद मेरा भविष्य क्या होगा? और मैं उन्हें कहता कि स्वार्थी मत बनो और मेरे बारे में सोचो। क्योंकि अगर कुछ भी गड़बड़ हुई तो मैं तो सबकुछ गंवा बैठूंगा।”

'जंजीर' के एक सीन में प्राण और अमिताभ।

‘जंजीर’ के एक सीन में प्राण और अमिताभ।

खराब शुरुआत देख अमिताभ हो गए थे बीमार

मेहरा के मुताबिक, कोलकाता में फिल्म अच्छी चली। लेकिन बॉम्बे में शुरूआती चार दिन अच्छे नहीं रहे। वे कहते हैं, “मुझे लगा कि फिल्म फ्लॉप हो जाएगी। खराब शुरुआत देख अमिताभ पर इतना बुरा प्रभाव पड़ा कि उन्हें फीवर आ गया।”

चार दिन बाद 100 रु. में बिका 5 रु. का टिकट

मेहरा आगे कहते हैं, “चार दिन बाद जब दूसरे सप्ताह की बुकिंग शुरू हुई तो मैं बांद्रा स्थित गैएटी गैलेक्सी सिनेमा के सामने से गुजर रहा था। मैंने देखा कि टिकट खिड़की पर एडवांस बुकिंग वालों की भीड़ जमा है और 5 रुपए का टिकट 100 रुपए में बेचा जा रहा था। मैं हैरान था। मैंने इससे पहले किसी भी फिल्म के लिए गैएटी गैलेक्सी के बाहर इतनी भीड़ नहीं देखी थी। जब अमिताभ ने इस बारे में सुना तो उनका बुखार बढ़कर 104 डिग्री पहुंच गया। दरअसल, उन्हें यकीन नहीं हुआ था कि वे अब स्टार बन चुके थे।”

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